संख्या पद्धति पर हिंदी ब्लॉग: शुरुआत से एडवांस तक

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RS Chauhan
8/14/2025 4 min read
संख्या पद्धति पर हिंदी ब्लॉग: शुरुआत से एडवांस तक

भूमिका

गणित में संख्या पद्धति (Number System) एक बुनियादी अवधारणा है, जिसका उपयोग रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर उच्च गणितीय गणनाओं तक होता है। इस ब्लॉग में हम संख्याओं के विभिन्न प्रकार, उनकी विशेषताएं, उदाहरण, और एडवांस टॉपिक्स को विस्तार से समझेंगे।


1. संख्या पद्धति क्या है?

संख्या पद्धति वह तरीका है जिससे हम संख्याओं को दर्शाते हैं, लिखते हैं, और समझते हैं। यह ग्रसित प्रणाली है जिससे हम गणना और गणितीय क्रियाएं करते हैं।


2. संख्याओं के प्रकार

2.1 प्राकृतिक संख्याएँ (Natural Numbers)

ये 1, 2, 3, 4, ... आदि होती हैं। इन्हें 'N' से दर्शाते हैं।
उदाहरण: 5, 27, 102

2.2 पूर्णांक (Whole Numbers)

इनमें 0 भी शामिल होता है। यानी 0, 1, 2, 3, ...
उदाहरण: 0, 6, 28

2.3 पूर्ण संख्याएँ (Integers)

इनमें ऋणात्मक (Negative), शून्य और धनात्मक (Positive) संख्याएँ होती हैं।
उदाहरण: -5, 0, 15

2.4 वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers)

इनमें समस्त गणनीय और गैर-गणनीय संख्याएँ आती हैं।
उदाहरण: 2, -3, 0.4, √3

2.5 परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers)

जो संख्याएँ p/q के रूप में लिखी जाती हैं, जहाँ p और q पूर्णांक हैं व q ≠ 0।
उदाहरण: 2/3, -7/4, 5

2.6 अपूर्णांक संख्याएँ (Irrational Numbers)

जो संख्याएँ p/q के रूप में नहीं लिखी जा सकतीं।
उदाहरण: √2, π


3. संख्या पद्धतियों के प्रकार

3.1 दशमलव (Decimal Number System)

यह सबसे सामान्य है, जिसमें 0 से 9 तक के अंक होते हैं। यह आधार 10 (Base 10) पर आधारित है।

उदाहरण: 5492, 37

3.2 द्वियंत्रण (Binary Number System)

इसमें केवल 0 और 1 होते हैं। कंप्यूटर में यही प्रयुक्त है।
उदाहरण: 1011₂ = 11₁₀

3.3 अष्टाधारी (Octal Number System)

इसमें 0-7 के अंक होते हैं। आधार 8 है।
उदाहरण: 345₈

3.4 सोलहाधारी (Hexadecimal Number System)

इसमें 0-9 और A-F (10 से 15) होते हैं। आधार 16 है।
उदाहरण: 1A3F₁₆


4. आधार परिवर्तन (Base Conversion)

दशमलव से द्वियंत्रण में परिवर्तन

कदम:

  1. दशमलव संख्या को 2 से बार-बार भाग दीजिए।

  2. शेषफल को उल्टे क्रम में लिखिए।

उदाहरण: 13₁₀

  • 13 ➗ 2 = 6, शेष 1

  • 6 ➗ 2 = 3, शेष 0

  • 3 ➗ 2 = 1, शेष 1

  • 1 ➗ 2 = 0, शेष 1
    उत्तर: 1101₂

द्वियंत्रण से दशमलव में परिवर्तन

हर बिट को 2 की शक्ति से गुणा करके जोड़ें।

उदाहरण: 101₁₀ = 1×2² + 0×2¹ + 1×2⁰ = 4 + 0 + 1 = 5


5. संख्या की अभिव्यक्ति

स्थानिक मान (Place Value)

हर अंक का मान उसकी स्थिति पर निर्भर करता है।

उदाहरण:
3457 में '5' का मान = 5 × 10² = 500


6. प्राथमिकता वाले टॉपिक्स

6.1 पूर्ण संख्याओं का जोड़ और घटाव

  • 8 + (-3) = 5

  • -7 + 12 = 5

6.2 गुणा और भाग

  • 5 × (-2) = -10

  • 12 ÷ (-3) = -4

6.3 परिमेय संख्याओं का जोड़

  • 2/3 + 3/4 = (8 + 9)/12 = 17/12


7. सम और विषम संख्याएँ

  • सम संख्या: पूरी तरह 2 से भाग हो (4, 8, 10)

  • विषम संख्या: 2 से भाग नहीं होती (1, 3, 7)


8. अभाज्य और संयोज्य संख्याएँ

  • अभाज्य संख्याएँ: सिर्फ 1 और स्वयं से ही भाग होती हैं (2, 3, 5, 7)

  • संयोज्य संख्याएँ: जिनके एक से अधिक भाजक हों (4, 6, 8)


9. संख्याओं के बीच संबंध

महत्तम समापवर्त्य (HCF) व लघुत्तम समापवर्त्य (LCM)

HCF दो संख्याओं का सबसे बड़ा सामान्य भाजक।
LCM दो संख्याओं का सबसे छोटा सामान्य गुणनफल।


10. एडवांस टॉपिक्स

10.1 जटिल संख्याएँ (Complex Numbers)

वास्तविक और काल्पनिक मिलकर जटिल संख्या बनाती हैं।
उदाहरण: 2 + 3i

10.2 सरलीकरण (Simplification)

संख्याओं के समीकरण को आसान रूप में लाना।

उदाहरण:
(2 + 3) × (5 - 2) = 5 × 3 = 15

10.3 मौलिक प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic)

हर प्राकृतिक संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में लिखा जा सकता है।

उदाहरण:
12 = 2 × 2 × 3


11. प्रश्नावली और उदाहरण

  1. 715 को द्वियंत्रण में लिखिए।

    • 715 ÷ 2 ... शेषफल क्रम को उल्टा लिखें।

  2. 256 को अष्टाधारी में परिवर्तित करें।

  3. 42, 56 का HCF व LCM निकालिए।


12. निष्कर्ष

संख्या पद्धति गणित का मूल है। इसकी गहन समझ गणना, प्रतियोगी परीक्षाएँ और रोजमर्रा के जीवन में अत्यंत लाभकारी है। इस ब्लॉग के माध्यम से आप संख्या पद्धति के प्रकार, विशेषताएँ, आधार परिवर्तित करना, सम-अभाज्य संख्या, HCF-LCM और एडवांस टॉपिक्स को विस्तारपूर्वक सीख सकते हैं।

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